In SriLanka getting Ravan’s gold jewellery

यहाँ के जंगल की मिट्टी से निकल रहे हैं हीरे-जवाहरात

आये दिन हम सुनते रहते हैं कि यहाँ से हीरे निकले,वहां की ज़मीन से सोना निकला या ऐसी बहुत सी बाते हैं जहाँ से सोने जवाहरात निकलते रहते हैं। आज भी हम कुछ ऐसी खबर बताने जा रहे हैं। जहाँ की मिट्टी से हीरे जवाहरात निकल रहे हैं।

आपको बता दें कि यह जंगल कोलंबो से 200 किमी दूर राग्गला नामक एक छोटे से शहर का है। कहा जाता है कि आज भी इस जंगल में रावण से जुड़े बहुत से रहस्य जिंदा हैं। फ़िलहाल ये जंगल चाय के बागानों से सजा हुआ है।

दरअसल, इस जंगल के पास में लोगों की छोटी-छोटी बस्तियां हैं और इस इलाके में बाहर के किसी भी व्यक्ति की एंट्री पर भी बैन लगा हुआ है यानी यहां पर बाहर का कोई भी व्यक्ति नहीं सकता है।

लोगों का मानना है कि इस जगह पर कभी रावण का राजमहल हुआ करता था, वर्तमान में इस जगह से लोगों को काफी पुराने समय के बने हुए हीरे-जवाहरात और आभूषण मिल रहें हैं।जहाँ तक श्रीलंका की बात है तो ये बात सभी जानते हैं कि रावण लंका का सबसे बड़ा राजा हुआ करता था। इस दौरान उसके बहुत से महल और बहुत सी बनाई दुर्लभ कृतियां जमींदोज हो चुकी हैं, जिनका आज कोई निशां नहीं मिलता पर यह भी सच है कि रावण का महल सोने का था और उसके पास अथाह दौलत थी। आज उसी सोने के कुछ भाग यहां के स्थानीय निवासियों को मिल रहें हैं।

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - September 9, 2016 at 8:36 am

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Asin, Bipasha, Divyanka are Beautiful Celebrity brides of 2016

bbu7bvv bbu7bw1 bbu7dqo bbu7dqp bbu7dqs bbu7dqt bbu7dqx bbu7gcu bbu7psu bbu7psw bbu7rq5 bbu7rq8 bbu7rql bbu7uac bbu7uak bbu7ual bbu7uaq bbu7wlu bbu7wlw bbu7zhj bbu7zhtThis year has seen

a spate of Bollywood weddings, starting with southern belle Asin marrying

ASIN: Asin kicked

the weddings of 2016 off to a rolicking start with not one but multiple wedding

For the Hindu-

style wedding, Asin was wearing a bespoke Sabyasachi Mukherjee lehenga

For her

reception, Asin opted for a stunning Abu Jani Sandeep Khosla lehenga choli

URMILA MATONDKAR:

The second celebrity bride of 2016 was our very own Rangeela actress Urmila

According to

reports, the bespoke lehenga was made for her in just five days!

For the evening

reception party, Matondkar changed into a white suit with pale gold emellishments.

BIPASHA BASU:

Actress Bipasha Basu set social media on fire all through her wedding events

Basu seemed to have started

this new trending this year of pre-wedding shoots

For her mehendi

ceremony, Basu went for a Queen of the Forest look, with a beautiful off-white lehenga

Ahead of the

wedding, Basu was elegently dressed in a pink sari for a puja ceremony.

Looking very much

like Bengali bride, Basu chose a stunning red lehenga by the ace designer Sabyasachi

The entire

ensemble had a regal feel to it. Not only was the lehenga heavily embellished

For the

reception, the new bride sported sindoor with a casual hairdo

PREITY ZINTA:

Dimpled actress Preity Zinta had a very private wedding ceremony to the US-based

DIVYANKA TRIPATHI:

TV actress Divyanka Tripathi just tied the knot with fellow TV star Vivek Dahiya

For the

traditional haldi ceremony. Tripathi chose a beautiful yellow lehenga, with large embroidery

For the mehendi ceremony, the

actress changed into a pretty pink lehenga, and she let her stunning

For the sangeet ceremony,

Tripathi was dressed in a gold-and-blue lehenga, with an interesting choli

For the wedding,

Tripathi was dressed in a resplendent red-and-gold lehenga by Kalki Fashion

Only days before

the wedding, the photograph of Tripathi’s wedding gear was posted

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - at 6:45 am

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Pregnant hone ke upay hindi

Yaha aapko batayenge wife ko pregnent karne ka tarika, aur Pregnant hone ke upay hindi me.

Aapko yah bhi pata chalega ki ladki pregnant kaise hoti hai? Aur garbhvati hone ke lakshan kya hai?

jaldi pregnant karne ka tarika kya hai? Pregnancy ke symptoms in hindi me batayenge.

Best Hindi tips to get pregnant fast – तुरंत और आसानी से गर्भवती होने के तरीके – प्रेग्नेंट होने के टिप्स

एक महिला के लिए बच्चे को जन्म देना काफी प्रसन्नता की बात होती है, और वह इस दिन की काफी प्रतीक्षा करती है।गर्भावस्था की स्थिति अचानक नहीं आती, इसमें गणना का काफी बड़ा हाथ होता है। गर्भवती होने के लिए आपका फर्टिलाइजेशन (fertilization) अच्छे से होना चाहिए। आपको अपने मासिक धर्म (periodic cycle) का आंकलन करके उसी हिसाब से चलना चाहिए। शारीरिक सम्बन्ध के फलस्वरूप गर्भवती होने से पहले इस बारे में अच्छे से सोच लें कि आप असल में एक बच्चे को जन्म देना चाहती हैं या नहीं। इनफर्टिलिटी (infertility) की समस्या से ग्रस्त लोगों को डॉक्टर से सलाह करनी चाहिए तथा गर्भवती होने के अन्य तरीके प्रयोग में लाने चाहिए। आजकल जीवनशैली में परिवर्तन की वजह से पुरुष और महिलाओं की फर्टिलिटी का स्तर काफी कम हो गया है। नीचे गर्भवती होने के कुछ तरीकों के बारे में बताया गया है।

ज्यादातर जोड़े जो असुरक्षित यौन संबंध प्रस्थापित करते हो उसमे महिला को प्रेगनेंट करने का तरीका, प्रेग्नेंट/गर्भवती होने की(to become pregnant) ज्यादा संभावना होती है| जिस जोड़े को प्रजनन की समस्या न हो वे प्रेग्नेंट होने के टिप्स,कुछ आसान तरीकों का पालन करके उसमे महिला गर्भवती हो सकती है|

प्रेग्नेंट/ गर्भवती होने के लिए कुछ सुझाव (Instructions for getting pregnant)

  1. जोड़े को अपने आप को तनाव से मुक्त रखने की जरुरत है| तनावग्रस्त रहने से गर्भ रहने में मुश्किलें आ सकती हैं|
  2. महिलाओं के लिए अण्डोत्सर्ग का समय जाननेवाले किट का उपयोग करके सही समय का पता लगाना चाहिए। अण्डोत्सर्ग से पूर्व २४-३६ घंटे मूत्र में एलएच की वृद्धि होती है और यह समय प्रेग्नेंट/गर्भवती बनने(to get pregnancy) के लिए लाभकारी होता है|
  3. पुरुषों को ज्यादा व्यायाम नहीं करना चाहिए, गर्म पानी से टब बाथ नहीं लेना चाहिए और ज्यादा तंग कच्छे नहीं पेहेनने चाहिए|

प्रेग्नेंट/गर्भवती होने के बेहतरीन उपाय और प्राकृतिक तरीके (natural ways to get pregnant fast)
अगर लंबे समय बाद भी स्त्री को गर्भ न रहता हो तब वैद्यकीय सलाह की जरुरत पड़ती है| इसमें कुछ दवाइयां लेनी पड़ती हैं जो आपके प्रेग्नेंट/गर्भवती होने के अवसरों को बढ़ावा देती हैं|

निचे दिए गए कुछ प्राकृतिक तरीके मेहेंगे नहीं होते हैं| नियमित रूप से इनका पालन करने पर प्रेग्नेंट/गर्भवती रहने की संभावना बढती है|

  1. यौन संबंध के समय जोड़े कि शारीरिक अवस्था ऐसी हो जिससे पुरुष महिला के साथ गहरा संबंध प्रस्थापित कर सके|
  2. संबंध के बाद महिला को अपनी पीठ पर १५ मिनट तक लेटा हुआ रहना आवश्यक है जिससे पुरुष के शुक्राणु स्त्री के बीज तक पहुँच सके|
  3. गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन रोक देना चाहिए|
  4. मासिक धर्म का योग्य समय देखकर शरीर संबंध का समय तय किया जा सकता है|
  5. पुरुष और स्त्री को स्वस्थ जीवनशैली का पालन करना जरुरी है| ड्रग्स और शराब लेना बंद करें|
  6. स्त्री के शरीर में शुक्राणु थोड़े दिनों तक रहते हैं| इसलिए अक्सर संबंध रखना गर्भ रहने में मदद करता है|

प्रेग्नेंट होने के आसान टिप्स और तरीके (Easiest Way to Get fast conceive tips in Hindi)
कुछ स्त्रियों में आसानी से गर्भ रहता है पर कुछ स्त्रियों के लिए यह बड़ा मुश्किल होता है| कुछ आसान तरीकों का पालन करके प्रेग्नेंट होने के टिप्स से ऐसी स्त्रियाँ प्रेग्नेंट/गर्भवती हो सकती हैं|

  1. स्त्रियों के शरीर में बीज १२-२४ घंटे तक फलन के लिए उपलब्ध होते हैं जबकि  शुक्राणु ३ से ५ दिनों तक जिंदा रह सकते हैं| इसलिए २८ दिनों के बाद आनेवाले मासिक धर्म में पहले ११ से २१ दिन तक संबंध रखने से उपयोग हो सकता है|
  2. अक्सर संबंध रखना गर्भ रहने का आसान तरीका है| शरीर की ऐसी स्थिति जहाँ शुक्राणु आसानी से बीज तक पहुँच सके ऐसी स्थिति होना मदद करता है|
  3. जोड़े को तनाव मुक्त होना बहुत जरुरी होता है|
    अगर ऊपर दिए गए किसी भी सुझाव से प्रेग्नेंट नहीं होती तो डॉक्टर की सलाह लें|

वज़न घटाना (Losing weight)
कई बार वज़न ज़्यादा होने की वजह से महिलाओं को गर्भधारण करने में दिक्कतें पेश आती हैं। उन्हें बच्चे को जन्म देने में काफी परेशानी होती है, क्योंकि इस प्रक्रिया में उनके शरीर में जमा वसा एक बाधा बन जाती है। अतः एक बच्चे को जन्म देने के लिए पुरुष और महिला दोनों का ही स्वस्थ रहना काफी ज़रूरी है। अत्याधिक वज़न वाली महिलाओं को इनफर्टिलिटी की समस्या होने की संभावना काफी ज़्यादा होती है। अतः गर्भधारण का प्रयास करने से पहले महिलाओं को 2 से 3 महीने तक व्यायाम करके अपना वज़न कम करने का प्रयास करना चाहिए।

केमिकल्स से दूर रहें (Away from chemicals)
कारखानों तथा प्रयोगशालाओं में काम करने वाली महिलाएं रोज़ाना कठोर केमिकल्स के संपर्क में आती हैं। छपाई के कारखानों तथा फसलों के लिए कीटनाशक बनाने वाले उद्योगों में काम करने वालों को भी इनफर्टिलिटी की समस्या घेर सकती है। एक बार अगर आपने गर्भधारण का फैसला ले लिया है तो कृपया केमिकल्स से दूर रहें। अगर संभव हो तो अपना पेश बदल लें या फिर गर्भावस्था के समय से पहले और बाद के लिए छुट्टी ले लें। इससे आपके फर्टिलिटी तथा बच्चा दोनों ही सुरक्षित रहेंगे।

तनाव दूर करें (Avoiding stress)
आजकल ज़्यादातर लोग तनाव के शिकार हैं, और शायद यही वजह गर्भावस्था के स्तर के घटने की भी है। आजकल सभी लोगों को सारा दिन काम का बोझ तथा तनाव झेलना पड़ता है। दिमाग में पड़ने वाले प्रभाव के अलावा यह शरीर में उत्पादित होने वाले हॉर्मोन्स (hormones) में भी समस्या उत्पन्न करता है। अतः तनाव से दूर रहें तथा गर्भधारण का फैसला लेने से पहले हमेशा खुश रहने का प्रयास करें। आपको अपने बच्चे के बारे में सोचते हुए अपना तनाव कम करना चाहिए। चिंता की वजह को दूर करने की कोशिश करें।

सेक्स की प्रक्रिया को दोहराएं  (Having repeated sex)
सम्भोग दुनिया में बच्चे को लाने का एक अनोखा और आनंददायक तरीका है। प्रेगनेंट करने का तरीका में कुछ लोग काम के दबाव तथा अन्य जुड़े कारणों से पर्याप्त मात्रा में सेक्स की क्रिया को अंजाम नहीं दे पाते।पर अगर आप बच्चा चाहती हैं और एक बार सेक्स से कोई फायदा ना हो तो उर्वर दिनों (fertilizing days) को ध्यान में रखते हुए सेक्स की क्रिया को बार बार दोहराना काफी महत्वपूर्ण साबित होगा। महिलाओं का मासिक धर्म (menstrual cycle) 28 से 30 दिनों का होता है, जिसमें से 14 वें दिन वे सबसे ज़्यादा उर्वर अवस्था में रहती हैं। आपको इस बात की भी जानकारी होनी चाहिए कि अंडाणु (ovum) का जीवन 24 से 36 घंटों तक का ही रहता है। अतः आपको सम्भोग की क्रिया के लिए इस दिन के आसपास के समय का ही चुनाव करना चाहिए। इस समय सेक्स में लिप्त होने से गर्भधारण की संभावनाएं काफी बढ़ जाती हैं। आपको सम्भोग के बाद दवाई की दुकानों पर उपलब्ध यूरिन टेस्ट किट (urine test kit) से गर्भावस्था की जांच करनी चाहिए।

संतुलित खानपान (Balanced diet)
जब आपको गर्भधारण की इच्छा हो, उस समय आपको अपने खानपान की तरफ भी काफी ध्यान देना चाहिए। संतुलित आहार करें जिसमें पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन, मिनरल और अन्य पोषक पदार्थ हों (protein, minerals and other nutrients), जिससे कि गर्भधारण की प्रक्रिया में तेज़ी आ जाए। हमेशा पोषक भोजन करने की कोशिश करें, जिससे बिना किसी समस्या के आसानी से बच्चे को जन्म दिया जा सके। आप अपने खानपान में अन्य पूरक आहार (supplements) तथा माइक्रोन्यूट्रिएंट्स (micronutrients) भी शामिल कर सकती हैं।

किसी भी महिला के लिए मां बनना जीवन का सबसे खूबसूरत अनुभव होता है. इसके एहसास भर से न केवल वह महिला बल्कि उससे जुड़े बाकी सभी लोग भी रोमांचित हो उठते हैं. एक बच्चे के आ जाने से पूरे घर का माहौल हमेशा के लिए बदल जाता है. हालांकि गर्भवती होना और एक स्वस्थ बच्चे को जन्म देना संभवत: इस दुनिया की सबसे मुश्किल बात है. गर्भवती होने के लिए सही समय पर संबंध बनाना बहुत जरूरी है. साथ ही कई दूसरी अहम बातों को भी ध्यान में रखना जरूरी है.

ओव्यूलेशन की सही जानकारी
यह पीरियड्स से जुड़ा होता है. इस दौरान संबंध बनाने से गर्भधारण करने की संभावना सबसे अधिक होती है. पीरियड्स के सात दिन बाद ओव्यूलेशन साइकिल शुरू होती है और पीरियड्स के सात दिन पहले तक रहती है. इस समय को फर्टाइल स्टेज भी कहा जाता है.

सही उम्र में कर लें फैमिली प्लानिंग
पहले लोगों की शादियां सही उम्र में हो जाया करती थीं लेकिन अब समय बदल चुका है. शादियां अधिक उम्र में होती हैं और उसके बाद पति-पत्नी फैमिली प्लान करने में भी कम से कम दो साल का वक्त लेते हैं. गर्भ धारण करने के लिए 22 से 28 की उम्र बेस्ट होती है. इसका प्रमुख कारण यह है कि इस उम्र में महिला शारीरिक और मानसिक दोनों तौर पर तैयार होती है.

ऑर्गज्म का ख्याल रखना भी है जरूरी
गर्भवती होने के लिए ऑर्गज्म भी बहुत जरूरी कारक है. संबंधों के दौरान अगर महिला ऑर्गज्म को प्राप्त कर लेती है तो गर्भधारण की संभावना बहुत बढ़ जाती है. इसके अलावा अगर आप गर्भवती होना चाह रही हैं तो सबसे पहले अपनी पूरी जांच कराएं. खासतौर पर पॉलिसिस्टिक ओवेरियन सिस्ट को लेकर चेकअप कराएं.

अगर आप प्रेग्‍नेंट हैं और कॉफी की शौकीन हैं तो कुछ समय के लिए अपने इस शौक से दूरी बना लीजिए. जी हां, कॉफी से दूरी बनाकर आप अपने होने वाले बच्‍चे की सेहत को दुरुस्‍त रख सकती हैं. एक रिसर्च में पता चला है कि जो महिलाएं प्रेग्‍नेंसी के दौरान सिर्फ 2 कप कॉफी भी पीती हैं, उनके होने वाले बच्‍चे को ल्‍यूकेमिया होने का खतरा ज्‍यादा होता है.रिसर्च में पता चला है कि कॉफी पीने वाली महिलाओं के बच्‍चों को बचपन में ही ल्‍यूकेमिया का खतरा 60 फीसदी तक ज्‍यादा होता है. जानकारों का कहना है कि सरकार को इस संबंध में चेतावनी जारी कर देनी चाहिए. सरकार को ठीक उसी तरह प्रेग्‍नेंसी के दौरान कॉफी नहीं पीने के लिए चेतावनी जारी करनी चाहिए, जिस तरह से शराब और स्‍मोकिंग के लिए की जाती है.

उनका मानना है कि कैफीन मां के गर्भ में पल रहे भ्रूण की कोशिकाओं में डीएनए को बदल सकता है और इससे भ्रूण में ट्यूमर के पनपने का खतरा बढ़ सकता है. शोधकर्ताओं ने 20 से भी ज्‍यादा मौजूदा अध्‍ययनों को देखा और पाया कि जो महिलाएं प्रेग्‍नेंसी के दौरान कॉफी पीती हैं उनके बच्‍चों में ल्‍यूकेमिया का खतरा 20 फीसदी ज्‍यादा होता है. यही नहीं उन्‍हें ये भी पता चला कि जो महिलाएं दो कप से ज्‍यादा कॉफी पीती हैं उनके बच्‍चों के लिए खतरा 60 फीसदी बढ़ जाता है.

प्रसूति एवं स्त्री रोग से संबंधित अमेरिकी जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार प्रेग्‍नेंसी के दौरान 4 या उससे ज्‍यादा कप कॉफी पीने वाली महिलाओं के बच्‍चों में ल्‍यूकेमिया का खतरा 72 फीसदी ज्‍यादा होता है. गौरतलब है कि यूके में हर साल 500 से भी ज्‍यादा बच्‍चों का ल्‍यूकेमिया का इलाज होता है और यह बच्‍चों में पाया जाने वाला सबसे आम कैंसर है. अच्‍छी बात ये है कि इसका पता जल्‍दी चल जाता है और कीमोथैरिपी से इसका इलाज हो जाता है, इसमें सफलता की दर भी 80 फीसदी है.

क्या आप मां बनने वाली हैं? अगर हां तो इस खुशी के मौके पर आपको दिवाली में बहुत सतर्क रहने की जरूरत है. पटाखों से निकलने वाला धुआं, धमाके की आवाज और केमिकल गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक होते हैं. साथ ही ये भ्रूण को भी नुकसान पहुंचाते हैं.नर्चर आईवीफ सेंटर की स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना धवन बजाज कहती हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान प्रदूषण गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए समस्या उत्पन्न कर सकता है. केमिकल्स के सीधे संपर्क में आने से गर्भ में पल रहे बच्चे और मां दोनों को खतरा हो सकता है. उन्होंने कहा कि जिन्हें सांस की समस्या हो, उन्हें हर हाल में प्रदूषण से दूर रहना चाहिए. खासकर अगर किसी महिला को अस्थमा की समस्या है तो उन्हें हर वक्त अपने साथ इनहेलर रखना चाहिए. एलर्जी के खतरे को कम करने के लिए जब तक संभव हो सजावट की फूल-मालाएं आदि को घर से बाहर ही रखें. साथ ही उन्हें घर के भीतर लाने से पहले पानी से अच्छी तरह से छिड़काव करें. ऐसा करने से उन फूलों पर लगी धूल और पराग खत्म हो जाएगी और एलर्जी से भी बचाव होगा.

डॉ. अर्चना के अनुसार, प्रदूषण पेट में पल रहे मासूम के बहुत नुकसानदेह है. मां जो कार्बन मोनोक्साइड सांस के जरिए लेंगी, वह हानिकारक गैस भ्रूण के प्लेसेंटा से हो कर गुजरे तो गर्भ में पल रहे बच्चे को पर्याप्त आक्सीजन नहीं मिल पाता. यह भ्रूण के विकास में रुकावट का कारण भी बन सकता है. उन्होंने कहा कि अक्सर महिलाएं त्योहार की तैयारियों में व्यस्त होकर भोजन के प्रति लापरवाही कर जाती हैं. उन्हें थोड़ी-थोड़ी मात्रा में 1 से 2 घंटे के अंतराल पर पौष्टिक भोजन लेते रहना  चाहिए और संभव हो तो हर घंटे में पानी पीते रहना चाहिए. ऐसा करने से चक्कर आने की समस्या, बेहोशी और सुस्ती से आप खुद को बचा सकती हैं.

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Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - April 7, 2016 at 6:52 pm

Categories: Relations   Tags: ,

Places to Find Your Future Girlfriend

जानिये 7 ऐसी जगह जहां आपको मिलेगी अपने सपनों की रानी

किसी डेटिंग सर्विस या फिर फेसबुक पर आप लड़कियों से मिल सकते हो पर क्या गारंटी है की वो एक अच्छी लड़की है। आप एक अच्छे लड़के हैं और आप एक अच्छी लड़की चाहते हैं तो कहाँ पर आपको आपके लिए अच्छी लड़की मिलेगी? जहाँ पर आपकी होने वाली दुल्हन सबसे ज्यादा आराम से होगी, खुश होगी और अपने जैसे लोगो के साथ होगी। तो सोचिये की आप को कौन सी जगह पसंद है वहां जाना शुरू कर दीजिये और बस कुछ दिनों की बात है कोई न कोई आपके दिल को सुकून देने वाला मिल ही जायेगा।

मछली पकड़नी है तो वहां जाना होगा जहाँ मछली है, तो वो कौन सी जगह है जहाँ आपको मछिलयाँ मिल जाये, जहाँ पर वो अच्छी लड़की है।

SEX-First-Date-Tips-8

कॉफ़ी शॉप

ये मेरे हिसाब से बहुत अच्छी जगह होती है लड़कियों से मिलने के लिए और दिन के समय तो ये जगह उत्तम है। कॉफ़ी पर किसी से भी घंटो बात कर सकते है, आप को यहाँ लड़कियाँ पढ़ते हुए, कॉफ़ी पीते हुए, दोस्तों से मिलते हुए मिल जाएगी। यहाँ पर बातचीत शुरू करना बहुत आसान है, आप किसी किताब के बारे में पूछ सकते है की वो कैसी है और आप भी पड़ने के लिए सोच रहे है। इसी तरह की छोटी सी बाते कोई भी लड़की बुरा नहीं मानेगी।

एक और अच्छा तरीका है की आप बोले की मेरे लैपटॉप या बैग को देख ले जब तक मैं कॉफ़ी लेकर आता हूँ। जब वापस आये तो तो उसे थैंक यू कहे और अपना परिचय दे और काम में लग जाये। अगर वो आपको पसंद करगी तो थोड़ी सी देर में वो फिर से आप से बात करेगी, अगर वो ऐसा नहीं करती है तो कोई और आ जाएगी। आपको बहुत से मौके मिलेंगे, बातचीत बढ़ाने के लिए।

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लोकल बस स्टॉप, ट्रैन या मेट्रो

अगर आप किसी वर्किंग या कॉलेज लड़की की तलाश में है तो आप अपने लोकल बस स्टॉप, ट्रैन या मेट्रो स्टेशन पर जा सकते है। क्युकिँ किसी भी लड़की को अपने ऑफिस या कॉलेज जाने के लिए कोई न कोई ट्रांसपोर्ट यूज़ करना ही होता है। ऐसे बहुत से एक्साम्प्ले  है जहां बस, ट्रैन, मेट्रो में लव स्टोरी स्टार्ट हुई है। आप बस ये देखिये की आपको कौन पसंद है फिर उसे आप हाय या बाय के इशारे से अपनी बात शुरू कर दीजिये 3-4 बार ऐसा करने के बाद अगर आपको रिप्लाई मिलता है तो आप अपनी बात शुरू कर सकते हैं
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क्लास

जी हाँ क्लास, आपको याद है की आपकी क्लास में कितनी लड़कियाँ थी, कॉलेज तो लड़कियों से भरा हुआ था, तो किसी भी उम्र में क्लास क्यों नहीं। लड़कियों को रोचक लड़के पसंद आते हैं, और सबसे अच्छी बात है की आप कुछ नया सीखे और नए लोगो से मिले। अगर आप किसी अच्छी लड़की से मिलना चाहते है तो तो क्लास एक बहुत अच्छी जगह है।

अब ये आपको सोचना है की कौन सी क्लास करनी है, अगर आप यूनिवर्सिटी या कॉलेज में जाते है तो किसी भी क्लास में एडमिशन ले सकते है और वो एक लम्बा कोर्स हो सकता है। कुछ अलग सोचे तो आप नयी भाषा सीख सकते है जैसे की स्पेनिश या संस्कृत, कुकिंग क्लासेज भी होती है, या फिर सॉफ्टवेयर, या फिर आर्ट और पेंटिंग, आप  अपने आराम से निकलना पड़ेगा और कुछ नया करना पड़ेगा। अब आप किसी क्लास के बाद किसी के साथ कॉफ़ी पीने जा सकते है, ये बहुत आसान हो जाता है, किसी को भी कहे की क्या मुझे किसी विषय के बारे में कुछ सीखा सकते है और आपका काम बन गया।
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योग और ध्यान

आप योग का कोई शिविर में भाग ले सकते है,  जब आप एक नए लड़के होते है तो आप के बहुत सी बाते होती है पूछें के लिए और आप को इसके लिए किसी जान पहचान की जरूरत नहीं है, आप किसी के पास भी जाये और पूछ ले। योग से आपका शरीर और मस्तिष्क भी स्वस्थ रहेगा और आप अन्य कामो में भी ध्यान लगा सकते है।
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शॉपिंग मॉल में

आपने सोचा नहीं होगा पर शॉपिंग मॉल के बहुत बढ़िया जगह होती है लड़कियों से मिलने के लिए।  पर कभी भी उन लड़कियों से फ़्लर्ट नहीं करे जो वहां काम करती है, वो रोज़ ही हज़ारो लड़को से मिलती है जो उनसे फ़्लर्ट करने के कोशिश करते है, और वो इन बातो से थक गयी होती है। पर लड़कियाँ वहां घूमने आती है, शॉपिंग करने आती है आप उनसे बात करने की कोशिश करे। जैसे की आपको अपनी बहिन के राखी में कुछ देना है तो ये अच्छा मौका है की वहां आप किसी से पूछ ले की लड़कियों को क्या अच्छा लगेगा और आपको समझ में नहीं आ रहा है। अगर वो आपकी शॉपिंग में मदद कर रही है तो बहुत अच्छा है, आप उसको कुछ खाने के लिए पूछ सकते है और कॉफ़ी के लिए भी। इस तरह आप उनके साथ बैठ कर कॉफ़ी भी पी सकते है और उसका फ़ोन नंबर भी मांग सकते हैं।
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पार्क या आपकी कॉलोनी

अगर आपके पास कोई पालतू जानवर है तो बहुत अच्छा है, क्योकि जहाँ कोई छोटा सा पालतू जानवर होता है तो सब लोग उसे खेलने और मिलने आ जाते है। छोटे बच्चे खासकर उसके साथ खेलना चाहते है, धीरे धीरे आप सबको जानने लगते है।

लड़कियों को जानवरो से बड़ा प्यार होता है और ये बातचीत शुरू करना करने का सबसे अच्छा मौका होता है।

अगर आपके पास कोई पालतू जानवर नहीं है तो पार्क में घूमने जाये, वहां पर आपको कई लोग मिलेंगे, मगर वहां आपको रोज़ जाना पड़ेगा क्योकि तभी आप किसी से बात करने का मौका देख सकते है। जैसे की अगर कोई लड़की वहां पर रोज़ दौड़ती है तो आप कुछ दिनों उसकी तरह देख कर मुस्कुराये और एक दिन उसे कोई चैलेंज दे की जैसे देखते है कौन पहले 10 चक्कर पार्क के लगता है। अगर वो नहीं मांगेगी तो कोई बात नहीं, आपकी जान पहचान तो हो गयी। आप आप कभी भी शाम को मिलने के लिए बुला सकते है।
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बुकस्टोर (किताब की दुकान)

मुझे किताबे पसंद है और मुझे बुकस्टोर बहुत पसंद आते है, वहां पर किताबो को देखना और पड़ना एक अच्छा अनुभव होता है। जब आप किसी किताब की दुकान में होते है तो आप किसी से भी नयी किताब के बारे में पूछ सकते है। लड़कियाँ आप से बात करने में नहीं डरेगी और अपनी बात उनसे कर सकते है। आप किसी को जैसे कह सकते है की आप वो किताब पढ़ कर बताये की कैसी है और इस तरह आपका उसका फ़ोन नंबर आप मांग सकते है। यहाँ पर इंटेलीजेंट लड़कियाँ को मिलने के बहुत मौके है, तो इन मौको का फायदा आप नयी लड़कियों से मिलने किए लिए उठा सकते है।

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - at 12:49 pm

Categories: Relations   Tags:

IDFC Bank partners with Uphold for instant cross-border remittances

IDFC Bank on Thursday said it is partnering with Uphold, a cloud-based financial platform, for easy inward remittances to India, subject to approval from the RBI.

The partnership will enable Uphold users in the the US and UK, to send money or make payments instantly to anyone in India, redeemable directly through any Indian bank. How it works? Uphold members can create a secure one-time use code to email or text to anyone in India. The receipt can then instantly redeem the full value by entering the secure code through IDFC Bank’s website and the funds will be transferable into any bank account in India.

IDFC Bank in remittance pact with Uphold
“We believe the benefits of today’s digital money ecosystem should be available to everyone, across geographies and customer segments,” said Dr. Rajiv Lall, founder and CEO, IDFC Bank, which started operations last October with 48 operational branches.
“Receiving more than $72 billion in 2015, India is the largest remittance country. We are addressing common challenges that stem from a mobile-first population dispersed around the countryside that have had to rely on high-fee brick and mortar wire services far too long,” said Anthony Watson, president and CEO, Uphold.

IDFC Bank has partnered with global financial platform Uphold for inward remittances into the country. Starting with the UK and US, Uphold’s users will be able to send money or make payments to anybody in the country, which will be redeemable in any Indian bank, IDFC Bank said in a statement today. The partnership is yet to receive RBI nod, it added. The private lender, which started operations in October last, currently has 48 branches.

 

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - April 2, 2016 at 9:58 am

Categories: Finance   Tags:

Young startup leaders lead from the front

For Kunal Shah, cofounder of online mobile recharge platform Freecharge, trust and openness are the foundation stones of his leadership style. Shah, the man who struck one of the biggest deals in consumer Internet space in India when Snapdeal acquired his company for an estimated $400 million, believes that in a startup, empowerment is not a word but happens by default. “Trust to the point that scares you… and hire people smarter than you,” said the 32-year-old, who did philosophy in college and then dropped out of his management course. “Leading in a startups is about extraordinary demonstration of trust,” Shah said.

“Result is the only thing I am worried about. How they do it is up to them,” said Jaydeep Barman, cofounder and chief executive of Faasos. Entrepreneurs do not want a boss to tell them what to do, and they should try to build the same culture within their own companies, he suggested.

According to Barman, his style his not always casual or lighthearted, but he does not challenge every decision. “I don’t dictate. We believe in joint problem solving … anyone can call me up without being afraid at any point of time,” he added. Azhar Iqubal, cofounder of Inshorts, leads his team by being a friend.

“Yet, I clearly define the professional expectations and desired outcomes,” said Iqubal. The company, which was started by three IIT alumni, has shown exponential growth in the last one year. The average age of its team of 60 is 24. “The biggest responsibility of a leader is putting the right people on the right job and empowering them with the ability to make independent decisions … Each manager in our organisation is an entrepreneur in his or her own way because everyone is constantly focused towards making things better and quicker.”

Leadership experts say leading in startups and leading in large established organisations are two different ballgames. In startups, everyone has high energy and high level of excitement, so motivation isn’t a problem. “In a startup, it is easy to connect and get across a message,” said Vikram Bhalla, managing director at Boston Consulting Group India. However, the challenge for startups is that everything is fluid and hence everyone, including the leadership, needs to be flexible.

Also, the level of uncertainty of a startup is different from that of an established organisation. “In a startup, people pour in with ideas and we test out most ideas. Whereas in a large organization, you plan for a year and execute. Here on a daily basis you run experiments. For us things change every day,” said Barman of Faasos.

BCG’s Bhalla, an expert on leadership, said the key leadership tenets of a startup entrepreneur is passion for an idea as well as ability to execute and, most importantly, building a team. Leadership experts say that millennials look for open communication, flexibility, and empowerment.

“At UrbanClap, we openly talk about what is working well, what is not working well, gaps in our business model or understanding, my own shortcomings as a leader, etc. I openly talk about these things with everyone in my team,” said cofounder Abhiraj Bhal. “It helps build trust.”

For Suchi Mukherjee, CEO of LimeRoad, finding a great bunch of people, setting them a clear goal and managing the culture is the essence of leadership. “I encourage radical candor among my team which ensures everyone is completely transparent with each other in an extremely professional way,” said Mukherjee.

Finding the right talent is the key, she said. “Experience, for me, is secondary. It is more important to look for the growth potential of an individual. Then, there is continuous multi-tasking. There are no clearly defined roles for every member of the team,” she said. “Every individual has to have a fighter gene to succeed. You have to be really passionate about what you are doing. And always be prepared for failures and learn to live with bad days.”

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - at 8:49 am

Categories: Finance   Tags:

Mithila Palkar Youtube Cup Songs Marathi

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Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - at 6:51 am

Categories: India   Tags:

Answer

  • 1. Book
    2. Story
    3. Pages
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    5. Novel
    6. Words

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - February 4, 2016 at 5:49 pm

Categories: Uncategorized   Tags:

Co-op society might go into re-development

Unstamped flat agreement no bar for redevelopment benefits

 

Non-payment of stamp duty on flat purchase document and non-registration thereof cannot in any manner affect your entitlement to a new unit under a redevelopment project.
A residential property was purchased in Mumbai in 1985. The sale deed is on a Rs5 stamp paper. Does that mean stamp duty is already paid on that property or stamp duty is not yet paid? In case the flat is not registered, is it mandatory to register the flat purchased from the builder in 1985? The co-op society might go into re-development. If the property is not registered what will be the legal consequences? Can that property be re-sold without registration?
—Akbarali Beddingwala
You have stated that property was purchased in 1985 but you have not stated the date of purchase.

With effect from December 10, 1985, where in case of an agreement to sell an immovable property, the possession thereof is transferred or agreed to be transferred to the purchaser, before the execution or at the time of execution or after the execution of such agreement, then such an agreement to sell is deemed as conveyance and stamp duty thereon is leviable accordingly.

Before the said date, agreement to sell was not considered as deemed conveyance and therefore such agreement was liable to stamp duty as applicable to a normal agreement, which was Rs5 at that time.

Vested views have been expressed time and again that even such agreements were liable to stamp duty on market value at that time and therefore now need to be cured by payment of deficient stamp duty with other consequential payments.

However, non-payment of stamp duty on such an agreement cannot invite any consequences and therefore there is no infirmity in such agreement. You have used the term “sale deed” in your query.

A sale deed is a conveyance and therefore before December 10, 1985 also, it required stamp duty on conveyance of immovable property.

Whether you purchased flat before or after 1985, title in an immovable property cannot be transferred without registration of the document transferring the title. However, in case of a unit in a co-operative housing society, if the flat has already been transferred in your name, then you have a good title despite non-registration of the document of purchase.

Society cannot insist for registration of your document of purchase. Non-registration does not invite any penal provisions.

Non-payment of stamp duty on flat purchase document and non-registration thereof cannot in any manner affect your entitlement to a new unit and other benefits under a redevelopment project.

There is no bar on sale of a flat in the above circumstances. However, if your document of purchase was liable to stamp duty, the buyer would definitely consider such defect while buying your flat and may obtain suitable writing and indemnity from you or may require you to remove the defect by paying stamp duty with interest.

 

Builders are facing a dilemma over 1% VAT

Whether sale of under construction flat is a sale of immovable property or is a works contract is a bone of contention between the builders and revenue authorities for indirect taxation including value added tax (“vat”). Since around the year 2005 Central and State governments have been tempted to take a view that when a builder sells an under construction unit, then in respect of such sale the builder thereafter becomes a works contactor.
Conceptually and commercially, the analogy is not logical at all as such transaction is of sale of immovable property and not that of works contract. On such and other reasons like constitutionally, sale of immovable property does not come within the taxing purview of the State governments, in a writ petition by the MCHI, a stay has been granted by the Bombay High Court granting relief to its members from payment of vat subject to some procedural compliances. In view of pending writ petition, applicability of vat to such transactions is yet to be decided.

In the meantime, in the recent State budget, Maharashtra Government has attempted to lure builders by providing a composition scheme to tax them at 1% of the value of the unit in respect of sales of under construction units along with land or interest underlying the land. In pursuance of such enactment, a notification dated 09 07 2010 has also been issued. Value of the unit for this purpose would mean sale price as stated in the agreement for sale or stamp duty valuation whichever is higher. Agreements registered on or after 01 04 2010 are eligible for the Scheme.

In this background, it is for a particular builder to decide whether to opt for this 1% scheme and pay vat accordingly in respect of agreements registered on or after 01 04 2010. For the earlier transactions, earlier provisions including the earlier composition scheme of 5% would apply. Logically, by accepting 1% taxation, the builder would have to accept the proposition in law that he is a works contractor in respect of such transactions. Although the State Government has offered to charge only at 1% tax but it is not necessary that the same incentive rate would continue in future also. Many controversial taxes have made their easy entry with lesser rates initially followed by increased rates.

However, as a flat purchaser, if a builder decides to pay tax, even in protest then certainly he will be entitled to recover the same from you unless otherwise agreed in your contract. As a flat purchaser you are not entitled to contend that since vat is not applicable on sale of under construction flats therefore you will not pay the same.

 

Rules for removal of chairman from committee

Our society has elected managing committee of members in August 2010. Now, due to disputes and other problems, five committee members want to remove the chairman
Our society has elected managing committee of members in August 2010. Now, due to disputes and other problems, five committee members want to remove the chairman. They are also demanding re-election of the entire committee or they will resign and reduce committee to minority. Will our committee be valid then? Tenure of our committee is 5 years which is found to be quite long.
In the context of your query, chairman, secretary or treasurer can be removed by a no-confidence motion in a special meeting of the committee called and presided by the Registrar or under delegated authority by an assistant registrar or an officer above his rank.
The notice for such meeting will have to be given by one-third members of the committee and motion of no confidence is to be passed by three-fourth members present at such meeting. Attendance at such meeting will have to be two-third of the committee members.

If 5 out of 9 members of the committee resign, the strength of the committee would reduce to minority and apparently, functioning of the committee becomes questionable. However, the apprehensions about the validity of the committee are ill conceived. It is true that to transact business at a committee meeting, members present should form quorum agenda. However, such requirement of quorum would not be applicable for the purposes of filling in vacancies caused by death, resignation, disqualification or removal of committee members. Period of office of a co-opted member, would be
co-terminus with tenure of the committee, which in your case is 5 years from the date of election. Tenure of the committee can be reduced by an amendment to the byelaws.

Redevelopment panel can be formed within a society

As redevelopment, being a subject to be taken with utmost precaution and involves the ability to understand complex legal, taxation and construction aspects, the managing committee or the general body of the society can take a decision to form a redevelopment committee.
In the process of redevelopment of our property, can we form a separate redevelopment committee and how it can function in a co-operative housing society along with the managing committee?
As redevelopment, being a subject to be taken with utmost precaution and involves the ability to understand complex legal, taxation and construction aspects, the managing committee or the general body of the society can take a decision to form a redevelopment committee. The powers and functions of the committee can be decided by a concerned resolution of the managing committee or general body as the case may be.
But in any case, formation of such a committee will have to be authorised by the general body. The minutes of the meetings of the redevelopment committee should be separately recorded. The committee will report to the general body or the managing committee depending on by whom it has been formed.

Our society has sizeable amounts invested as sinking fund and other funds. Is it possible to collect proportionate amounts from the new flat purchasers in the redevelopment scheme? Whether a flat of an existing member sold after redevelopment would attract short-term or long-term capital gains?
It is possible to stipulate in the redevelopment agreement for collection of proportionate contribution from the incoming members. However, to ensure such collection, the documentation will have to provide strict terms and conditions detailing consequences for defaults to ensure that the funds reach the society. Not admitting the flat purchasers as members of the society may not be a workable solution. A reconstructed flat (after redevelopment) would attract long term capital gains if the earlier flat was acquired before 36 months of the date of sale.

Under the model bye laws, the member who has purchased a car parking space from the builder can sell the same. How to implement this bye law?
The model bye laws are only in the form of suggestions. Even when the bye laws are adopted by the society, the same are not tenable in law if they run contrary to the provisions of the prevailing laws. The position of law with reference to Maharashtra Ownership Flats Act, 1963, is settled by various court decisions that a car parking space including a stilt parking space cannot be sold by a builder or a promoter. In view of such a legal position, the bye-laws providing for sale of car parking spaces are void in law.

 

Society is not a beneficial party in sale/ transfer of flats and membership rights

Contribution from members received by the society towards cost of land and building(s) and other amenities will be covered by the concept of mutuality and therefore, will not be an income in the hands of the society.
We have taken a plot of land on lease in the name of the society. Now we are constructing flats and shops. There are investors also, who transferred their investments for profit. Flats are of different sizes and members would pay extra amounts for different kinds of amenities and car parking facilities. Our turnover is a few crores of rupees. Can we make profits? How would these activities attract tax?

Contribution from members received by the society towards cost of land and building(s) and other amenities will be covered by the concept of mutuality and therefore, will not be an income in the hands of the society.

Even though profit is made by the society, tax would not be attracted because of the application of concept of mutuality. A more pertinent question for you should be what will the society do of such profits.

When a member sells his residential flat and transfers his membership rights in the society, under Income-Tax Act, 1961, such transaction would be on account of such member and therefore, the tax implications would arise upon such member.

The society is not a beneficial party in respect of the sale consideration in transactions involving sale and transfer of flats and membership rights.

The society would be receiving transfer premium in respect of such transactions. Such transfer premium will also get covered by the concept of mutuality. To the extent the society collects such transfer premium from the members and within the framework of its byelaws, such transfer premium would not be taxable in the hands of the society.

So far as payments to contractors and sub-contractors are concerned, the same would be subject to the provisions of tax deduction at source under Section 194C of the of Income-Tax Act, 1961.

 

Succession of property of Hindus dying intestate

How can one utilise a TDR for construction purposes?

We are two brothers and four sisters, all married. The last sister married in 1984. My father has made a house out of his earnings in Visakhapatnam in 1987. He did not make any will and he expired in 2006. My mother is also no more. Now, what is the status if we have to share the property among ourselves? Do we come under the definition of a Hindu Undivided Family (HUF) and are we called a joint Hindu family governed by the Mitakshara law? What would happen if one of the married sons or daughters had died leaving children before the death of father or mother? We are Hindus.
—CV Nageswar Rao, Visakhapatnam
Since your father expired intestate in 2006 and left inter alia a house property and as it transpires that your father was a Hindu at the time of his death, the succession in your case would be governed by the provisions of Hindu Succession Act, 1956.

A property can become HUF property in various ways and one of them is that an ancestral property becomes HUF property. In your case since your father acquired the subject property out of his own earnings, therefore, the same is not a HUF property. On the death of your father, if he was survived by his wife then the widow along with the sons and daughters became equal co-owners of the house property.

Thereafter when the mother died, assuming without leaving a valid will, then the co-ownership share of the mother would get distributed to all the sons and daughters. In case your mother had pre-deceased your father, then obviously, the property would be shared between the sons and daughters.

Before the death of father or mother, if a son had died leaving behind a widow and/or children in his branch, then in such a case, the share of such pre-deceased son would be distributed among his widow and his children equally. Before the death of father or mother, if a daughter had died leaving behind widow and/or children in her branch, then in such a case, the share of such pre-deceased daughter would be distributed amongst her children equally.

How can one utilise a TDR for construction purposes?
For utilisation of transferable development right (TDR), a proposal has to be submitted in the prescribed form to the building proposal department of Mumbai Municipal Corporation giving details of the development rights certificate (DRC) to be utilised, details of the plot upon which to be utilised along with proposed building plans, etc. A holder of DRC who desires to use the floor space index (FSI) certified therein on a particular plot of land, shall attach to his application for development permission, valid DRC to the extent required. The proposals are approved on merits like any other building construction proposal and subject to DC regulations.
The DRC may be used on one or more plot or plots of land whether vacant or already developed by putting up a new construction or by constructing additional storeys subjects to guidelines provided under the development control regulations.

 

Limited liability pact may work better for development

Taxation of a development agreement or redevelopment agreement would depend upon the terms & conditions contained therein.
I want to give my land and existing structure under a development agreement. However, because of income tax implications, I am advised to enter into a partnership or joint development agreement with the developer. What is your view on it?
Taxation of a development agreement or redevelopment agreement would depend upon the terms & conditions contained therein. In general, to the extent of transfer of development rights, the cost of acquisition whereof is nil, should not attract any income tax implications.
However, VAT & service tax implications would also have to be analysed with reference to the contents of the development agreement. As far as forming a partnership is concerned, it involves law of agency with the result that actions and inactions of a partner can bind the firm and other partners also with unlimited liabilities and consequently every partner’s personal assets and properties can also be subjected to such liability and can be attached.

In this context, the newly introduced form of organisation namely a limited liability partnership may be a better option as it is a combination of limited liability like a company as well as flexibility of partnership. Further, in partnership there will be profit sharing against the ascertained fixed gains in a development agreement.

The partnership or joint venture should be genuine in substance or otherwise name sake or disguised documents may be disregarded by tax authorities as income tax law would proceed on substance rather than nomenclature assigned to a document. A joint venture may become an association of persons.

Can the co-operative society in which I am a member, appoint me as an auditor?
Unlike the Companies Act, 1956, the Maharashtra Co-operative Societies Act, 1960, does not prohibit a member of a co-operative society to be its auditor. Therefore, you can be an auditor in your own society provided that you are not in the managing committee because if you are a part of the management, as an auditor you would be required to report upon your own actions including inactions which cannot be allowed as your independence can be questionable.

A member of my society has given me a document that states he has gifted his flat to his wife. What are the procedures that I should follow as a secretary of the society?
You will have to verify that the gift deed has been properly stamped and registered. The transfer procedure in case of gift would be the same as in the case of sale of a flat. However, there will not be any premium on transfer inter alia for the reason that the transfer is to a family member only.

 

 

Occupation certificate not a must for deemed conveyance

Conveyance executed and property cards not being in the name of society would not be a big issue as the same is an issue of procedural compliances only.
How are feasibility report and conveyance related to redevelopment of society properties? Are occupation certificate and building plan necessary for deemed conveyance?
—Ashok Mhatre
It is desirable that feasibility of redevelopment of a property is determined before a society initiates the process of inviting a developer.

This includes verification of papers and documents including building plans of property, understanding the requirement of perfecting title of the property, estimation of available floor space index (FSI), premium FSI, transfer of development rights FSI, areas constructible by use of FSI and without FSI, etc.
A society which does not have conveyance would not be able to proceed on its own for redevelopment.

Conveyance executed and property cards not being in the name of society would not be a big issue as the same is an issue of procedural compliances only.

It is quite possible that documents like occupation certificate, building plans and other papers and documents, which the builder is bound to provide to the society, have not been provided.
In the absence of such papers and documents also, the right to deemed conveyance cannot be denied by the competent authority.
In fact, deemed conveyance is the remedy provided inter alia for cases of non-cooperating landlords and builders and developers.

Therefore, once the titles of the flats purchasers are established, deemed conveyance would have to be granted.

Competent authority is an administrator of law and cannot provide for the requirements not stated in the law.

I have dividend income from shares and also have other business income and capital gains from sale of shares, some of which were purchased with borrowed funds. We also have to bear securities transaction tax. Some transactions were squared off without taking delivery. What will be the income tax implication?
— Meenakshi V
As far as shares purchased with borrowed funds are concerned, the same may give rise to business income.
Sale of other shares in delivery-based transactions may give rise to capital gains or business income depending upon the frequency of transactions, intention at the time of
purchase, treatment in books of account, disclosure in financial statements, etc.

As far as dividend income is concerned, the same is exempt, whether the shares are held as investments or stock in trade.
It is possible to take a view that borrowed funds utilised for dealing in shares should not attract disallowance on relevant interest although dividend income therefrom is tax-free because in such cases dividend income is incidental and the predominant activity is to earn from dealing in shares.

For the purposes of section 14A, which disallows expenditure incurred to earn tax-free income, all direct and indirect expenses, including administrative, rent etc would have to be considered and if nexus of some expenses to dividend income is established, the same would be disallowable.

Securities transaction tax suffered on purchase and sale of shares to the extent sales of such shares give rise to capital gains, would not be allowable as deduction.

Such tax paid for trading in shares would, however, be allowable as deduction from business income. Transactions settled without actual delivery would be treated as speculation transactions.

Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - February 3, 2016 at 12:07 pm

Categories: Co-operative Housing Society   Tags: , , ,

गिनती संस्कृत में counting in sanskrit

गिनती संस्कृत में

अंक हिन्‍दी संस्‍कृत अंग्रेजी
एक एकम् One
दो द्वे Two
तीन त्रीणि Three
चार चत्‍वारि Four
पांच पंच Five
छ: षड् Six
सात सप्‍त Seven
आठ अष्‍ट Eight
नव नव Nine
१० दस दश Ten
English Numerals Hindi Sanskrit
One 1 एक एकः
Two 2 दो द्वौ
Three 3 तीन त्रयः
Four 4 चार चत्वारः
Five 5 पाञ्च पञ्च
Six 6 छे षट्
Seven 7 सात सप्त
Eight 8 आठ अष्ट
Nine 9 नौ नव
Ten 10 दस दश
Eleven 11 ग्यारह एकादशन्
Twelve 12 बारह द्वादशन्
Thirteen 13 तेरह त्रयोदशन्
Fourteen 14 चौदह चतुर्दशन्
Fifteen 15 पन्द्रह पञ्चदशन्
Sixteen 16 सोलह षोडशन्
Seventeen 17 सत्रह सप्तदशन्
Eighteen 18 अठारह अष्टादशन्
Nineteen 19 उन्नीस नवदशन्, एकोनविंशति, ऊनविंशति, एकान्नविंशति
Twenty 20 बीस विंशति
Twenty-one 21 इक्कीस एकाविंशति
Twenty-two 22 बाईस द्वाविंशति
Twenty-three 23 तेईस त्रयोविंशति
Twenty-four 24 चौबीस चतुर्विंशति
Twenty-five 25 पच्चीस पञ्चविंशति
Twenty-six 26 छब्बीस षड्विंशति
Twenty-seven 27 सत्तइस सप्तविंशति
Twenty-eight 28 अठ्ठाइस अष्टाविंशति
Twenty-nine 29 उन्तीस नवविंशति, एकोनात्रिंशत्, ऊनत्रिंशत्, एकान्नत्रिंशत्
Thirty 30 तीस त्रिंशत्
Thirty-one 31 इकतीस एकत्रिंशत्
Thirty-two 32 बत्तीस द्वात्रिंशत्
Thirty-three 33 तेतीस त्रयत्रिंशत्
Thirty-four 34 चौतीस चतुस्त्रिंशत्
Thirty-five 35 पैंतीस पञ्चत्रिंशत्
Thirty-six 36 छत्तीस षट्त्रिंशत्
Thirty-seven 37 सैंतीस सप्तत्रिंशत्
Thirty-eight 38 अड़तीस अष्टात्रिंशत्
Thirty-nine 39 अन्तालीस एकोनचत्वारिंशत्
Forty 40 चालीस चत्वारिंशत्
Forty-one 41 इकतालीस एकचत्वारिंशत्
Forty-two 42 ब्यालीस द्विचत्वारिंशत्, द्वाचत्वारिंशत्
Forty-three 43 तेतालीस त्रिचत्वारिंशत्, त्रयश्चत्वारिंशत्
Forty-four 44 चौवालीस चतुश्चत्वारिंशत्
Forty-five 45 पैंतालीस पञ्चचत्वारिंशत्
Forty-six 46 छ्यालीस षट्चत्वारिंशत्
Forty-seven 47 सैतालीस सप्तचत्वारिंशत्
Forty-eight 48 अड़तालीस अष्टचत्वारिंशत्, अष्टाचत्वारिंशत्
Forty-nine 49 उनंचास एकोनपञ्चाशत्
Fifty 50 पचास पञ्चाशत्
Fifty-one 51 इक्यावन एकपञ्चाशत्
Fifty-two 52 बावन द्विपञ्चाशत्
Fifty-three 53 त्रेपन त्रिपञ्चाशत्
Fifty-four 54 चौअन चतुःपञ्चाशत्
Fifty-five 55 पचपन पञ्चपञ्चाशत्
Fifty-six 56 छप्पन षट्पञ्चाशत्
Fifty-seven 57 सत्तावन सप्तपञ्चाशत्
Fifty-eight 58 अठ्ठावन अष्टपञ्चाशत्
Fifty-nine 59 उनसठ एकोनषष्ठिः
Sixty 60 साठ षष्ठिः
Sixty-one 61 इकसठ एकषष्ठिः
Sixty-two 62 बासठ द्विषष्ठिः
Sixty-three 63 त्रेसठ त्रिषष्ठिः
Sixty-four 64 चौंसठ चतुःषष्ठिः
Sixty-five 65 पैंसठ पञ्चषष्ठिः
Sixty-six 66 छ्यासठ षट्षष्ठिः
Sixty-seven 67 सरसठ सप्तषष्ठिः
Sixty-eight 68 अरसठ अष्टषष्ठिः
Sixty-nine 69 उनहत्तर एकोनसप्ततिः
Seventy 70 सत्तर सप्ततिः
Seventy-one 71 इकहत्तर एकसप्ततिः
Seventy-two 72 बहत्तर द्विसप्ततिः
Seventy-three 73 तिहत्तर त्रिसप्ततिः
Seventy-four 74 चौहत्तर चतुःसप्ततिः
Seventy-five 75 पिचत्तर पञ्चसप्ततिः
Seventy-six 76 छियत्तर षट्सप्ततिः
Seventy-seven 77 सतत्तर सप्तसप्ततिः
Seventy-eight 78 अठत्तर अष्टसप्ततिः
Seventy-nine 79 उनासी एकोनाशीतिः
Eighty 80 अस्सी अशीतिः
Eighty-one 81 इक्यासी एकाशीतिः
Eighty-two 82 ब्यासी द्वशीतिः
Eighty-three 83 तिरासी त्र्यशीतिः
Eighty-four 84 चौरासी चतुरशीतिः
Eighty-five 85 पिचासी पञ्चाशीतिः
Eighty-six 86 छयासी षडशीतिः
Eighty-seven 87 सतासी सप्ताशीतिः
Eighty-eight 88 अठासी अष्टाशीतिः
Eighty-nine 89 नवासी एकोननवतिः
Ninety 90 नब्बे नवतिः
Ninety-one 91 इक्यानवे एकनवतिः
Ninety-two 92 बानवे द्विनवतिः
Ninety-three 93 त्रानवे त्रिनवतिः
Ninety-four 94 चौरानवे चतुर्नवतिः
Ninety-five 95 पिञ्चानवे पञ्चनवतिः
Ninety-six 96 छ्यानवे षण्णवतिः
Ninety-seven 97 सत्तानवे सप्तनवतिः
Ninety-eight 98 अठ्ठानवे अष्टनवतिः
Ninety-Nine 99 निन्यानवे एकोनशतम्
Hundred 100 सौ शतम्

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Be the first to comment - What do you think?  Posted by admin - February 2, 2016 at 1:46 pm

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